सीता केरि करेहु रखवारी
सीता केरि करेहु रखवारी
चौपाई ५, दोहा २७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
सीता केरि करेहु रखवारी। बुधि बिबेक बल समय बिचारी॥ प्रभुहि बिलोकि चला मृग भाजी। धाए रामु सरासन साजी॥ ५ ॥
अर्थ
तुम बुद्धि और विवेक के द्वारा बल और समय का विचार करके सीता की रखवाली करना। प्रभु को देखकर मृग भाग चला। श्रीरामचन्द्रजी भी धनुष चढ़ाकर उसके पीछे दौड़े।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।
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स्वर्ण मृग और मारीच वध