अति कृपाल रघुनायक सदा दीन पर

दोहा १ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

अति कृपाल रघुनायक सदा दीन पर नेह। ता सन आइ कीन्ह छलु मूरख अवगुन गेह॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी, जो अत्यन्त कृपालु हैं और जिनका दीनों पर सदा स्नेह रहता है, उनसे भी उस अवगुणों के घर मूर्ख जयन्त ने आकर छल किया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का दोहा १ है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।

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जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति