सापत ताड़त परुष कहंता
सापत ताड़त परुष कहंता
चौपाई १, दोहा ३४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
सापत ताड़त परुष कहंता। बिप्र पूज्य अस गावहिं संता॥ पूजिअ बिप्र सील गुन हीना। सूद्र न गुन गन ग्यान प्रबीना॥ १ ॥
अर्थ
शाप देता हुआ, मारता हुआ और कठोर वचन कहता हुआ भी ब्राह्मण पूजनीय है, ऐसा संत कहते हैं। शील और गुण से हीन भी ब्राह्मण पूजनीय है। और गुणगणों से युक्त और ज्ञान में निपुण भी शूद्र पूजनीय नहीं है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “कबंध उद्धार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कबंध के शापमुक्त होकर दिव्य गंधर्व स्वरूप प्राप्त करने का वर्णन है।
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कबंध उद्धार