मन क्रम बचन कपट तजि जो
मन क्रम बचन कपट तजि जो
दोहा ३३ · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव। मोहि समेत बिरंचि सिव बस ताकें सब देव॥ ३३ ॥
अर्थ
मन, वचन और कर्म से कपट छोड़कर जो भूदेव ब्राह्मणों की सेवा करता है, मुझ समेत ब्रह्मा, शिव आदि सब देवता उसके वश में हो जाते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “कबंध उद्धार” प्रकरण का दोहा ३३ है। इस प्रकरण में कबंध के शापमुक्त होकर दिव्य गंधर्व स्वरूप प्राप्त करने का वर्णन है।
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कबंध उद्धार