संतत मो पर कृपा करेहू

चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

संतत मो पर कृपा करेहू। सेवक जानि तजेहु जनि नेहू॥ धर्म धुरंधर प्रभु कै बानी। सुनि सप्रेम बोले मुनि ग्यानी॥ २ ॥

अर्थ

मुझ पर निरन्तर कृपा करते रहियेगा और अपना सेवक जानकर नेह न छोड़ियेगा। धर्मधुरंधर प्रभु श्रीरामजी के वचन सुनकर ज्ञानी मुनि प्रेमपूर्वक बोले--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
अनसूया का सीता को उपदेश