जासु कृपा अज सिव सनकादी

चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

जासु कृपा अज सिव सनकादी। चहत सकल परमारथ बादी॥ ते तुम्ह राम अकाम पिआरे। दीन बंधु मृदु बचन उचारे॥ ३ ॥

अर्थ

ब्रह्मा, शिव और सनकादि सभी परमार्थवादी (तत्त्ववेत्ता) जिनकी कृपा चाहते हैं, हे रामजी! आप वही निष्काम पुरुषों के भी प्रिय और दीनों के बन्धु भगवान् हैं, जो इस प्रकार कोमल वचन बोल रहे हैं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश