संतन्ह के लच्छन रघुबीरा

चौपाई ३, दोहा ४५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

संतन्ह के लच्छन रघुबीरा। कहहु नाथ भव भंजन भीरा॥ सुनु मुनि संतन्ह के गुन कहऊँ। जिन्ह ते मैं उन्ह कें बस रहऊँ॥ ३ ॥

अर्थ

हे रघुवीर! हे भव-भंजन, भीर! अब कृपा कर संतों के लक्षण कहिये। [श्रीरामजी ने कहा--] हे मुनि! सुनो, मैं संतों के गुणों को कहता हूँ, जिनके कारण मैं उनके वश में रहता हूँ।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।

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नारद-राम संवाद