रिषि निकाय मुनिबर गति देखी

चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

रिषि निकाय मुनिबर गति देखी। सुखी भए निज हृदयँ बिसेषी॥ अस्तुति करहिं सकल मुनि बृंदा। जयति प्रनत हित करुना कंदा॥ २ ॥

अर्थ

ऋषिसमूह मुनिश्रेष्ठ शरभंगजी की यह [दुर्लभ] गति देखकर अपने हृदय में विशेषरूप से सुखी हुए। समस्त मुनिवृन्द श्रीरामजी की स्तुति कर रहे हैं [और कह रहे हैं] शरणागतहितकारी करुणाकन्द (करुणा के मूल) प्रभु की जय हो!।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा मुनियों की अस्थियाँ देख राक्षस वध की प्रतिज्ञा करने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना