पुनि रघुनाथ चले बन आगे
पुनि रघुनाथ चले बन आगे
चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे॥ अस्थि समूह देखि रघुराया। पूछी मुनिन्ह लागि अति दाया॥ ३ ॥
अर्थ
फिर श्रीरघुनाथजी आगे वन में चले। श्रेष्ठ मुनियों के बहुत-से समूह उनके साथ हो लिये। हड्डियों का ढेर देखकर श्रीरघुनाथजी को बड़ी दया आयी, उन्होंने मुनियों से पूछा।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा मुनियों की अस्थियाँ देख राक्षस वध की प्रतिज्ञा करने का वर्णन है।
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राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना