राम कहा तनु राखहु ताता

चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

राम कहा तनु राखहु ताता। मुख मुसुकाइ कही तेहिं बाता॥ जा कर नाम मरत मुख आवा। अधमउ मुकुत होइ श्रुति गावा॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा--हे तात! शरीर को बनाये रखिये। तब उसने मुसकराते हुए मुँह से यह बात कही-मरते समय जिनका नाम मुख में आ जाने से अधम (महान्‌ पापी) भी मुक्त हो जाता है, ऐसा वेद गाते हैं--।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।

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राम का विलाप और जटायु प्रसंग