लै दच्छिन दिसि गयउ गोसाईं
लै दच्छिन दिसि गयउ गोसाईं
चौपाई २, दोहा ३१ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
लै दच्छिन दिसि गयउ गोसाईं। बिलपति अति कुररी की नाईं॥ दरस लागि प्रभु राखेउँ प्राना। चलन चहत अब कृपानिधाना॥ २ ॥
अर्थ
हे गोसाईं! वह उन्हें लेकर दक्षिण दिशा को गया है। सीताजी कुररी (कुर्ज) की तरह अत्यन्त विलाप कर रही थीं। हे प्रभो! मैंने आपके दर्शनों के लिये ही प्राण रोक रखे थे। हे कृपानिधान! अब ये चलना ही चाहते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।
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राम का विलाप और जटायु प्रसंग