रघुपति चित्रकूट बसि नाना
रघुपति चित्रकूट बसि नाना
चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना॥ बहुरि राम अस मन अनुमाना। होइहि भीर सबहिं मोहि जाना॥ १ ॥
अर्थ
चित्रकूट में बसकर श्रीरघुनाथजी ने बहुत-से चरित्र किये, जो श्रुति के लिये अमृत के समान हैं। फिर श्रीरामजी ने मन में ऐसा अनुमान किया कि मुझे सब लोग जान गये हैं, इससे [यहाँ] बड़ी भीड़ हो जायगी।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।
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अत्रि मिलन और स्तुति