जानतहूँ पूछिअ कस स्वामी

चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

जानतहूँ पूछिअ कस स्वामी। सबदरसी तुम्ह अंतरजामी॥ निसिचर निकर सकल मुनि खाए। सुनि रघुबीर नयन जल छाए॥ ४ ॥

अर्थ

[मुनियों ने कहा--] हे स्वामी! आप सर्वदर्शी (सर्वज्ञ) और अन्तर्यामी (सबके हृदय की जाननेवाले) हैं। जानते हुए भी [अनजान की तरह] हमसे कैसे पूछ रहे हैं ? राक्षसों के दल ने सब मुनियों को खा डाला है [ये सब उन्हीं की हड्डियों के ढेर हैं]। यह सुनते ही श्रीरघुवीर के नेत्रों में जल छा गया (उनकी आँखों में करुणा के आँसू भर आये)।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा मुनियों की अस्थियाँ देख राक्षस वध की प्रतिज्ञा करने का वर्णन है।

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राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना