पुनि फिरि राम निकट सो आई
पुनि फिरि राम निकट सो आई
चौपाई ९, दोहा १७ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि फिरि राम निकट सो आई। प्रभु लछिमन पहिं बहुरि पठाई॥ लछिमन कहा तोहि सो बरई। जो तृन तोरि लाज परिहरई॥ ९ ॥
अर्थ
वह लौटकर फिर श्रीरामजी के पास आयी। प्रभु ने फिर उसे लक्ष्मणजी के पास भेज दिया। लक्ष्मणजी ने कहा--तुम्हें वही बरेगा जो तृण तोड़कर लज्जा परिहरई (अर्थात् जो निपट निर्लज्ज होगा)।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पंचवटी निवास में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को ज्ञान, वैराग्य, माया और भक्ति के उपदेश का वर्णन है।
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पंचवटी निवास और राम-लक्ष्मण संवाद