पुलकित गात अत्रि उठि धाए

चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

पुलकित गात अत्रि उठि धाए। देखि रामु आतुर चलि आए॥ करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए॥ ३ ॥

अर्थ

शरीर पुलकित हो गया, अत्रिजी उठकर दौड़े। श्रीरामजी को दौड़े आते देखकर और भी शीघ्र चले आये। दण्डवत् करते हुए मुनि ने श्रीरामजी को हृदय से लगा लिया और प्रेमाश्रुओं के जल से दोनों जनों को नहला दिया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।

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अत्रि मिलन और स्तुति