प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी
चौपाई ६, दोहा २१ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहिं बेगि नीति अस सुनी॥ ६ ॥
अर्थ
नम्रता के बिना प्रीति और मद से गुणवान् शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं, ऐसा मैंने सुना है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा द्वारा रावण में दुराशा जगाना, सीता का अग्नि प्रवेश और माया सीता का प्राकट्य का वर्णन है।
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शूर्पणखा का रावण के पास जाना, माया सीता