प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा

चौपाई १, दोहा २ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा। चला भाजि बायस भय पावा॥ धरि निज रूप गयउ पितु पाहीं। राम बिमुख राखा तेहि नाहीं॥ १ ॥

अर्थ

मन्त्र से प्रेरित होकर वह ब्रह्मबाण दौड़ा। कौआ भयभीत होकर भाग चला। वह अपना रूप धारण करके पिता के पास गया, पर श्रीरामजी का विरोधी जानकर उसे वहाँ नहीं रखा।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।

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जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति