प्रलंब बाहु विक्रमं
प्रलंब बाहु विक्रमं
छन्द ३, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं। निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं॥ ३ ॥
अर्थ
हे प्रभो! आपकी लंबी भुजाओं का पराक्रम और आपका ऐश्वर्य अप्रमेय (बुद्धि के परे अथवा असीम) है। आप तरकस और धनुष-बाण धारण करनेवाले तीनों लोकों के स्वामी हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द ३, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।
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अत्रि मिलन और स्तुति