निकाम श्याम सुंदरं
निकाम श्याम सुंदरं
छन्द २, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
निकाम श्याम सुंदरं। भवांबुनाथ मंदरं। प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं॥ २ ॥
अर्थ
आप नितान्त सुन्दर श्याम, संसार [आवागमन] रूपी समुद्र को मथने के लिये मन्दराचल रूप, फूले हुए कमल के समान नेत्रों वाले और मद आदि दोषों से छुड़ानेवाले हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द २, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
अत्रि मिलन और स्तुति