दिनेश वंश मंडनं
दिनेश वंश मंडनं
छन्द ४, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं। मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं॥ ४ ॥
अर्थ
सूर्यवंश के भूषण, महादेवजी के धनुष को तोड़नेवाले, मुनिराजों और संतों को आनन्द देनेवाले तथा देवताओं के शत्रु असुरों के समूह का नाश करनेवाले हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द ४, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।
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अत्रि मिलन और स्तुति