प्रभु आसन आसीन भरि लोचन सोभा

सोरठा ३ · अरण्यकाण्ड

सोरठा पाठ

प्रभु आसन आसीन भरि लोचन सोभा निरखि। मुनिबर परम प्रबीन जोरि पानि अस्तुति करत॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु आसन पर विराजमान हैं। नेत्र भरकर उनकी शोभा देखकर परम प्रवीण मुनिश्रेष्ठ हाथ जोड़कर स्तुति करने लगे—

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का सोरठा ३ है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।

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अत्रि मिलन और स्तुति