पति प्रतिकूल जनम जहँ जाई
पति प्रतिकूल जनम जहँ जाई
चौपाई १०, दोहा ५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
पति प्रतिकूल जनम जहँ जाई। बिधवा होइ पाइ तरुनाई॥ १० ॥
अर्थ
किन्तु जो पति के प्रतिकूल चलती है, वह जहाँ भी जाकर जन्म लेती है, वहीं जवानी पाकर (भरी जवानी में) विधवा हो जाती है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १०, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।
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अनसूया का सीता को उपदेश