पाप उलूक निकर सुखकारी
पाप उलूक निकर सुखकारी
चौपाई ४, दोहा ४४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
पाप उलूक निकर सुखकारी। नारि निबिड़ रजनी अँधिआरी॥ बुधि बल सील सत्य सब मीना। बनसी सम त्रिय कहहिं प्रबीना॥ ४ ॥
अर्थ
पापरूपी उल्लुओं के समूह के लिये यह स्त्री सुख देनेवाली घोर अन्धकारमयी रात्रि है। बुद्धि, बल, शील और सत्य--ये सब मछलियाँ हैं और उन [को फँसाकर नष्ट करने] के लिये स्त्री बंसी के समान है, चतुर पुरुष ऐसा कहते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।
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नारद-राम संवाद