धर्म सकल सरसीरुह बृंदा

चौपाई ३, दोहा ४४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

धर्म सकल सरसीरुह बृंदा। होइ हिम तिन्हहि दहइ सुख मंदा॥ पुनि ममता जवास बहुताई। पलुहइ नारि सिसिर रितु पाई॥ ३ ॥

अर्थ

समस्त धर्म कमलों के झुंड हैं। यह नीच (विषयजन्य) सुख देनेवाली स्त्री हिम-ऋतु होकर उन्हें जला डालती है। फिर ममतारूपी जवास का समूह (वन) स्त्रीरूपी शिशिर-ऋतु को पाकर हरा-भरा हो जाता है।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।

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नारद-राम संवाद