नव पल्लव कुसुमित तरु नाना
नव पल्लव कुसुमित तरु नाना
चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
नव पल्लव कुसुमित तरु नाना। चंचरीक पटली कर गाना॥ सीतल मंद सुगंध सुभाऊ। संतत बहइ मनोहर बाऊ॥ ४ ॥
अर्थ
बहुत प्रकार के वृक्ष नये-नये पत्तों और [सुगन्धित] पुष्पों से युक्त हैं, [जिनपर ] भौंरों के समूह गुंजार कर रहे हैं। स्वभाव से ही शीतल, मन्द, सुगन्धित एवं मन को हरनेवाली हवा सदा बहती रहती है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति