कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं

चौपाई ५, दोहा ४० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं। सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं॥ ५ ॥

अर्थ

कोयलें “कुहू” “कुहू” का शब्द कर रही हैं। उनकी रसीली बोली सुनकर मुनियों का भी ध्यान टूट जाता है।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति