नारद देखा बिकल जयंता
नारद देखा बिकल जयंता
चौपाई ५, दोहा २ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
नारद देखा बिकल जयंता। लागि दया कोमल चित संता॥ पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही॥ ५ ॥
अर्थ
नारदजी ने जयन्त को व्याकुल देखा तो उनके कोमल चित्त में दया आ गयी। उन्होंने उसे तुरंत श्रीरामजी के पास भेज दिया। उसने [जाकर] पुकारकर कहा— हे शरणागत-हितकारी! मेरी रक्षा कीजिये।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जयन्त द्वारा कौए का रूप धरकर सीताजी को कष्ट देने और श्रीराम के बाण से भयभीत होकर शरण लेने का वर्णन है।
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जयन्त की कुटिलता और फलप्राप्ति