नमामि इंदिरा पतिं

छन्द ६, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

छन्द पाठ

नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं। भजे सशक्ति सानुजं। शची पति प्रियानुजं॥ ६ ॥

अर्थ

हे लक्ष्मीपते! हे सुखों की खान और सत्पुरुषों की एकमात्र गति! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे शचीपति (इन्द्र) के प्रिय छोटे भाई (वामनजी)! स्वरूपा-शक्ति श्रीसीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित आपको मैं भजता हूँ।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द ६, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।

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अत्रि मिलन और स्तुति