मनोज वैरि वंदितं
मनोज वैरि वंदितं
छन्द ५, दोहा ४ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
छन्द पाठ
मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं। विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं॥ ५ ॥
अर्थ
आप कामदेव के शत्रु महादेवजी के द्वारा वन्दित, ब्रह्मा आदि देवताओं से सेवित, विशुद्ध ज्ञानमय विग्रह और समस्त दोषों को नष्ट करनेवाले हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अत्रि मिलन और स्तुति” प्रकरण का छन्द ५, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अत्रि मुनि द्वारा श्रीराम के आश्रम में स्वागत और भावपूर्ण स्तुति का वर्णन है।
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अत्रि मिलन और स्तुति