मुनि समूह महँ बैठे सन्मुख सब

दोहा १२ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

मुनि समूह महँ बैठे सन्मुख सब की ओर। सरद इंदु तन चितवत मानहुँ निकर चकोर॥ १२ ॥

अर्थ

मुनियों के समूह में श्रीरामचन्द्रजी सबकी ओर सम्मुख होकर बैठे हैं (अर्थात् प्रत्येक मुनि को श्रीरामजी अपने ही सामने मुख करके बैठे दिखायी देते हैं और सब मुनि टकटकी लगाये उनके मुख को देख रहे हैं)। ऐसा जान पड़ता है मानो चकोरों का समुदाय शरत्पूर्णिमा के चन्द्रमा की ओर देख रहा हो।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का दोहा १२ है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन