तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं

चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं। तुम्ह सन प्रभु दुराव कछु नाहीं॥ तुम्ह जानहु जेहि कारन आयउँ। ताते तात न कहि समुझायउँ॥ १ ॥

अर्थ

तब श्रीरामजी ने मुनि से कहा-हे प्रभो! आपसे तो कुछ छिपाव है नहीं। मैं जिस कारण से आया हूँ, वह आप जानते ही हैं। इसी से हे तात! मैंने आपसे समझाकर कुछ नहीं कहा।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन