जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा
चौपाई ७, दोहा १२ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा। हरषे सब बिलोकि सुखकंदा॥ ७ ॥
अर्थ
वहाँ जहाँ तक अन्य मुनिगण थे, सभी आनन्दकन्द श्रीरामजी के दर्शन करके हर्षित हो गये।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन