मुनि मग माझ अचल होइ बैसा
मुनि मग माझ अचल होइ बैसा
चौपाई ८, दोहा १० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनि मग माझ अचल होइ बैसा। पुलक सरीर पनस फल जैसा॥ तब रघुनाथ निकट चलि आए। देखि दसा निज जन मन भाए॥ ८ ॥
अर्थ
[हृदय में प्रभु के दर्शन पाकर] मुनि बीच रास्ते में अचल होकर बैठ गये। उनका शरीर रोमांच से कटहल के फल के समान [कण्टकित] हो गया। तब श्रीरघुनाथजी उनके पास चले आये और अपने भक्त की प्रेमदशा देखकर मन में बहुत प्रसन्न हुए।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन