मुनिहि राम बहु भाँति जगावा

चौपाई ९, दोहा १० के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यान जनित सुख पावा॥ भूप रूप तब राम दुरावा। हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा॥ ९ ॥

अर्थ

श्रीरामजी ने मुनि को बहुत प्रकार से जगाया, पर मुनि नहीं जागे; क्योंकि उन्हें प्रभु के ध्यान का सुख प्राप्त हो रहा था। तब श्रीरामजी ने अपना राजरूप छिपा लिया और उनके हृदय में अपना चतुर्भुजरूप प्रकट किया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन