गुनातीत सचराचर स्वामी
गुनातीत सचराचर स्वामी
चौपाई १, दोहा ३९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
गुनातीत सचराचर स्वामी। राम उमा सब अंतरजामी॥ कामिन्ह कै दीनता देखाई। धीरन्ह कें मन बिरति दृढ़ाई॥ १ ॥
अर्थ
[शिवजी कहते हैं--] हे पार्वती ! श्रीरामचन्द्रजी गुणातीत (तीनों गुणों से परे), चराचर जगत् के स्वामी और सबके अंतर की जाननेवाले हैं। [उपर्युक्त बातें कहकर] उन्होंने कामी लोगों की दीनता (बेबसी) दिखलायी है और धीर (विवेकी) पुरुषों के मन में वैराग्य को दृढ़ किया है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति