अबिरल भगति मागि बर गीध गयउ

दोहा ३२ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

अबिरल भगति मागि बर गीध गयउ हरिधाम। तेहि की क्रिया जथोचित निज कर कीन्ही राम॥ ३२ ॥

अर्थ

अखण्ड भक्ति का वर माँगकर गृध्रराज जटायु श्रीहरि के परमधाम को चला गया। श्रीरामचन्द्रजी ने उसकी [दाहकर्म आदि सारी] क्रियाएँ यथायोग्य अपने हाथों से कीं।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “राम का विलाप और जटायु प्रसंग” प्रकरण का दोहा ३२ है। इस प्रकरण में सीता-वियोग में राम के विलाप और जटायु को मुक्ति मिलने का वर्णन है।

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राम का विलाप और जटायु प्रसंग