रे रे दुष्ट ठाढ़ किन होही
रे रे दुष्ट ठाढ़ किन होही
चौपाई ६, दोहा २९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
रे रे दुष्ट ठाढ़ किन होही। निर्भय चलेसि न जानेहि मोही॥ आवत देखि कृतांत समाना। फिरि दसकंधर कर अनुमाना॥ ६ ॥
अर्थ
[उसने ललकारकर कहा--] रे रे दुष्ट! खड़ा क्यों नहीं होता? निडर होकर चल दिया! मुझे तूने नहीं जाना? उसको यमराज के समान आता हुआ देखकर रावण घूमकर मन में अनुमान करने लगा--।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध