केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी

चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी। कहहु नाथ तुम्ह अंतरजामी॥ अस कहि प्रभु बिलोकि मुनि धीरा। लोचन जल बह पुलक सरीरा॥ ५ ॥

अर्थ

मैं किस प्रकार कहूँ कि हे स्वामी! आप अब जाइये ? हे नाथ! आप अन्तर्यामी हैं, आप ही कहिये। ऐसा कहकर धीर मुनि प्रभु को देखने लगे। मुनि के नेत्रों से [प्रेमाश्रुओं का] जल बह रहा है और शरीर पुलकित है।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अनसूया का सीता को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीता और अनसूया के मिलन तथा अनसूया द्वारा पातिव्रत धर्म के उपदेश का वर्णन है।

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अनसूया का सीता को उपदेश