करि पूजा मारीच तब सादर पूछी

दोहा २४ · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात। कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात॥ २४ ॥

अर्थ

तब मारीच ने उसको पूजा करके आदरपूर्वक बात पूछी--हे तात! आपका मन किस कारण इतना अधिक व्यग्र है और आप अकेले आये हैं ?।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का दोहा २४ है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।

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स्वर्ण मृग और मारीच वध