दसमुख सकल कथा तेहि आगें
दसमुख सकल कथा तेहि आगें
चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
दसमुख सकल कथा तेहि आगें। कही सहित अभिमान अभागें॥ होहु कपट मृग तुम्ह छलकारी। जेहि बिधि हरि आनौं नृपनारी॥ १ ॥
अर्थ
अभागे दशमुख ने उसके सामने सारी कथा कही और फिर अभिमान सहित कहा--छल करनेवाले कपट-मृग बनो, जिस विधि से मैं राजवधू को हर लाऊँ।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “स्वर्ण मृग और मारीच वध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मारीच का स्वर्ण मृग रूप धारण और श्रीराम द्वारा उसका वध तथा मोक्ष-प्रदान का वर्णन है।
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स्वर्ण मृग और मारीच वध