जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई
जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई
चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई। धन बल परिजन गुन चतुराई॥ भगति हीन नर सोहइ कैसा। बिनु जल बारिद देखिअ जैसा॥ ३ ॥
अर्थ
जाति, पाँति, कुल, धर्म, बड़ाई, धन, बल, परिजन, गुण और चतुराई—इन सबके होने पर भी भक्ति से रहित मनुष्य कैसा लगता है, जैसे जलहीन बादल [शोभाहीन] दिखायी पड़ता है।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति