नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं
चौपाई ४, दोहा ३५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं॥ प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरि रति मम कथा प्रसंगा॥ ४ ॥
अर्थ
मैं तुझसे अब अपनी नवधा भक्ति कहता हूँ। तू सावधान होकर सुन और मन में धारण कर। पहली भक्ति है संतों का संग। दूसरी भक्ति है मेरी कथा-प्रसंग में प्रेम।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति