अधम ते अधम अधम अति नारी

चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

अधम ते अधम अधम अति नारी। तिन्ह महँ मैं मतिमंद अघारी॥ कह रघुपति सुनु भामिनि बाता। मानउँ एक भगति कर नाता॥ २ ॥

अर्थ

जो अधम से भी अधम हैं, स्त्रियाँ उनमें भी अत्यन्त अधम हैं; और उनमें भी हे पापनाशन! मैं मन्दबुद्धि हूँ। श्रीरघुनाथजी ने कहा--हे भामिनि! मेरी बात सुन। मैं तो केवल एक भक्ति ही का सम्बन्ध मानता हूँ।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।

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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति