जद्यपि मनुज दनुज कुल घालक
जद्यपि मनुज दनुज कुल घालक
चौपाई ६, दोहा १९ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड
चौपाई पाठ
जद्यपि मनुज दनुज कुल घालक। मुनि पालक खल सालक बालक॥ जौं न होइ बल घर फिरि जाहू। समर बिमुख मैं हतउँ न काहू॥ ६ ॥
अर्थ
यद्यपि हम मनुष्य हैं, परन्तु दैत्यकुल का घालने वाले, मुनियों के पालक, दुष्टों के संहारक बालक हैं। यदि बल न हो तो घर लौट जाओ। संग्राम में विमुख मैं किसी को नहीं मारता।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध