हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन
हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन
दोहा २० (ख) · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
हरषित बरषहिं सुमन सुर बाजहिं गगन निसान। अस्तुतिकरि करि सब चले सोभित बिबिध बिमान॥ २० (ख) ॥
अर्थ
देवता हर्षित होकर फूल बरसाते हैं, आकाश में नगाड़े बज रहे हैं। फिर वे सब स्तुति करके अनेकों विमानों पर सुशोभित होकर चले गये।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध” प्रकरण का दोहा २० (ख) है। इस प्रकरण में शूर्पणखा की दुष्टता, उसके उकसावे पर खर-दूषण का श्रीराम से युद्ध और उनका संहार का वर्णन है।
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शूर्पणखा कथा, खर-दूषण वध