है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ

चौपाई ८, दोहा १३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ॥ दंडक बन पुनीत प्रभु करहू। उग्र साप मुनिबर कर हरहू॥ ८ ॥

अर्थ

हे प्रभो। एक परम मनोहर और पवित्र स्थान है; उसका नाम पंचवटी है। हे प्रभो। आप दण्डक वन को पवित्र कीजिये और श्रेष्ठ मुनि के कठोर शाप को हर लीजिये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन