बास करहु तहँ रघुकुल राया

चौपाई ९, दोहा १३ के अंतर्गत · अरण्यकाण्ड

चौपाई पाठ

बास करहु तहँ रघुकुल राया। कीजे सकल मुनिन्ह पर दाया॥ चले राम मुनि आयसु पाई। तुरतहिं पंचबटी निअराई॥ ९ ॥

अर्थ

हे रघुकुल के स्वामी! आप सब मुनियों पर दया करके वहीं निवास कीजिये। मुनि की आज्ञा पाकर श्रीरामचन्द्रजी वहाँ से चल दिये और शीघ्र ही पंचवटी के निकट पहुँच गये।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुतीक्ष्ण की भक्ति, अगस्त्य मुनि से संवाद, दंडक वन प्रवेश और जटायु मिलन का वर्णन है।

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अगस्त्य मिलन और जटायु मिलन