लोभ कें इच्छा दंभ बल काम
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम
दोहा ३८ (ख) · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि। क्रोध कें परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि॥ ३८ (ख) ॥
अर्थ
लोभ को इच्छा और दम्भ का बल है, काम को केवल स्त्री का बल है और क्रोध को कठोर वचनों का बल है; श्रेष्ठ मुनि विचार कर ऐसा कहते हैं।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति” प्रकरण का दोहा ३८ (ख) है। इस प्रकरण में शबरी पर प्रभु की कृपा, नवधा भक्ति उपदेश और पंपासर प्रस्थान का वर्णन है।
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शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति