हारि परा खल बहु बिधि भय
हारि परा खल बहु बिधि भय
दोहा २९ (क) · अरण्यकाण्ड
दोहा पाठ
हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ। तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ॥ २९ (क) ॥
अर्थ
सीताजी को बहुत प्रकार से भय और प्रीति दिखलाकर जब वह दुष्ट हार गया, तब उन्हें जतन कराके अशोक-वृक्ष के नीचे रख दिया।
संदर्भ
यह अरण्यकाण्ड के “जटायु-रावण युद्ध” प्रकरण का दोहा २९ (क) है। इस प्रकरण में जटायु द्वारा सीताजी की रक्षा हेतु रावण से वीरतापूर्ण युद्ध और घायल होने का वर्णन है।
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जटायु-रावण युद्ध