एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ

दोहा ४२ (ख) · अरण्यकाण्ड

दोहा पाठ

एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ। तब नारद मन हरष अति प्रभु पद नायउ माथ॥ ४२ (ख) ॥

अर्थ

कृपासिंधु श्रीरघुनाथजी ने मुनि से 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहा। तब नारदजी ने मन में अत्यन्त हर्षित होकर प्रभु के चरणों में मस्तक नवाया।

संदर्भ

यह अरण्यकाण्ड के “नारद-राम संवाद” प्रकरण का दोहा ४२ (ख) है। इस प्रकरण में देवर्षि नारद और श्रीराम के बीच भक्ति, नाम-महिमा और दिव्य कृपा के गूढ़ संवाद का वर्णन है।

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नारद-राम संवाद